अबू धाबी के क्राउन प्रिंस का ऐतिहासिक भारत दौरा, पीएम मोदी के साथ बड़े व्यापारिक सौदे और नई साझेदारियों पर चर्चा

नई दिल्ली, सितंबर 2024
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की पहली आधिकारिक भारत यात्रा ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच पहले से मजबूत कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को और गहराई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर, शेख खालिद 9-10 सितंबर 2024 को भारत आए, जहां दोनों देशों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच नए आर्थिक अवसरों और क्षेत्रीय स्थिरता के नजरिए से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और यूएई के ऐतिहासिक संबंध
भारत और यूएई के रिश्तों की जड़ें गहरी और ऐतिहासिक हैं। अगस्त 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में नई ऊर्जा आई। फरवरी 2022 में दोनों देशों के बीच एक विस्तृत आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) हुआ, जो व्यापारिक और निवेश सहयोग को मजबूत करने का एक मील का पत्थर साबित हुआ। इसके बाद, जुलाई 2023 में, स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (LCA) की शुरुआत की गई, जिसने भारतीय रुपये और यूएई दिरहम के माध्यम से सीमा पार लेनदेन को और सुगम बनाया। इस कदम ने व्यापारिक लेनदेन को आसान बनाया और दोनों देशों के कारोबारी साझेदारियों को और सशक्त किया।
2022-2023 के दौरान, भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 85 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही, यूएई भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के शीर्ष चार देशों में से एक है, जिससे यह साफ है कि यूएई का भारतीय बाजार में बड़ा विश्वास है। भारत के आर्थिक विकास में यूएई की महत्वपूर्ण भूमिका है और दोनों देश एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार बने हुए हैं।
शेख खालिद का दौरा: क्यों खास है?
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद की यह यात्रा केवल व्यापारिक चर्चाओं तक सीमित नहीं है। यह दौरा एक समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है, खासकर इजराइल-हमास संघर्ष के चलते। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर भी चर्चा की संभावना जताई गई है, क्योंकि भारत और यूएई की स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने राजनीतिक, व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, और सांस्कृतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। यह यात्रा न केवल मौजूदा क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करेगी, बल्कि नए और उभरते क्षेत्रों में भी साझेदारी के नए रास्ते खोलेगी।
महत्वपूर्ण बैठकें और कार्यक्रम
शेख खालिद की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक थी, जो हैदराबाद हाउस में आयोजित की गई। इस बैठक में, दोनों नेताओं ने कई द्विपक्षीय मुद्दों पर गहन चर्चा की। इसके अलावा, 10 सितंबर को, शेख खालिद मुंबई में एक व्यापारिक फोरम में हिस्सा लेंगे, जहां भारत और यूएई के शीर्ष व्यापारिक नेताओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर बात होगी।
प्रधानमंत्री मोदी और शेख खालिद की मुलाकात के अलावा, क्राउन प्रिंस का भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलने का कार्यक्रम था। इसके साथ ही, शेख खालिद राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।
रणनीतिक साझेदारी और आगे की दिशा
यूएई भारत के लिए न केवल एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है, बल्कि यह मध्य पूर्व में भारत के लिए एक प्रमुख सहयोगी भी है। शेख खालिद की इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
भारत और यूएई के बीच सहयोग का विस्तार केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण साझेदार बन रहे हैं। इसके साथ ही, भारत ने पिछले साल G20 की अध्यक्षता के दौरान यूएई को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित करके अपने मैत्रीपूर्ण रिश्ते को और मजबूती दी।
व्यापारिक समझौते और निवेश के अवसर
भारत और यूएई के बीच हाल के वर्षों में किए गए महत्वपूर्ण समझौतों में से एक CEPA (विस्तृत आर्थिक साझेदारी समझौता) है, जिसने दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम किया और निवेश के अवसरों को बढ़ावा दिया। इस समझौते ने भारतीय निर्यातकों के लिए यूएई बाजार में पहुंच को आसान बनाया है, खासकर कृषि और वस्त्र उद्योगों में।
इसके अलावा, जुलाई 2023 में शुरू की गई स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली ने भारतीय रुपया और यूएई दिरहम के उपयोग को सरल बना दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के रास्ते और भी सुगम हो गए हैं।
निष्कर्ष
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद की भारत यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ करेगी। दोनों देशों के नेताओं ने न केवल व्यापारिक सहयोग पर चर्चा की, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। इस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और यूएई के बीच सहयोग के नए द्वार खुले हैं, जो आने वाले समय में दोनों देशों के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित होंगे।
भारत और यूएई के बीच यह सहयोग भविष्य में और भी गहरा होगा, खासकर व्यापार, निवेश, शिक्षा, और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में, जिससे दोनों देशों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचने में मदद मिलेगी।
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Readers Comment
Manoj
Good post